Saturday, June 21, 2008

गंगा को बचाने आगे आए बाबा रामदेव




रामदेव बाबा ने योग के माध्यम से लोगों को स्वस्थ करने के साथ ही गंगा को बचाने का बीड़ा भी उठा लिया है। बाबा रामदेव ने गंगा को बचाने के लिए चल रहे गंगा रक्षा आंदोलन को अपना समर्थन ही नहीं दिया है बल्कि उसकी कमान भी पूरी तरह से अपने हाथों में ले ली है। बाबा रामदेव ने हरिद्वार में गंगा रक्षा मंच के गठन की घोषणा के साथ केंद्र और राज्य सरकार को चेतावनी भी दी है। बाबा रामदेव ने कहा है कि अगर सरकार ने गंगा की पवित्रता की रक्षा करने और उसे प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में कुछ नहीं किया तो तो देश भर में एक व्यापक जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। बाबा रामदेव ने मांग की कि गंगा को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर उसे संरक्षित किया जाए।

पतंजलि योग पीठ में गंगा रक्षा मंच के बैनर तले आयोजित संत-महात्माओं की सभा की अध्यक्षता करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि राममंदिर तो केवल हिन्दुओं के दिलों में विराजता है, पर गंगा धर्म, संप्रदाय और जातियों के भेद से दूर सबको जीवन देती है। गंगा विलुप्त हुई तो जनजीवन भी नहीं बचेगा, इसलिए गंगा को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए। इसके साथ ही बाबा ने गंगा रक्षा मंच के गठन की घोषणा भी की और कहा कि इस संस्था में कोई पदधिकारी नहीं होगा बल्कि इसमें सनातन, आर्य, जैन, सिख, बौद्ध सम्प्रदायों व समुदायों से जुड़े तमाम प्रमुख संत महात्माओं के विभिन्न मत-मतांतरों वाले आध्यात्मिक संगठन व संस्थाएं, देश के सभी प्रमुख संत, चाहे वह आसाराम बापू हों या श्रीश्री रविशंकर महाराज, सभी इसके मार्गदर्शक मंडल में शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा शांतिकुंज और पतंजलि योग पीठ भी इस अभियान में साथ होंगे। योग गुरु ने कहा कि मंच को राजनीतिक अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने उत्तरकाशी में चल रहे इंजीनियर गुरुदास अग्रवाल के आमरण अनशन को समर्थन देते हुए कहा कि गंगा के मुद्दे पर देश उनके साथ है।

स्वामी रामदेव ने कहा कि वह गंगा रक्षा मंच के मार्गदर्शक मंडल की सलाह पर न्यनूतम कार्यक्रम का निर्धारण करेंगे। यदि सरकारें उनके प्रतिवेदन को स्वीकार नहीं करती हैं तो समूचे देश में प्रचंड आन्दोलन छेड़ा जाएगा। संतों की सभा को निवृत शंकराचार्य सत्यमित्रानंद गिरि महाराज, स्वामी रामविलास वेदांति, पूर्व केंद्रीय गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद, स्वामी चिदानंद मुनि, स्वामी हंसदास, महंत हठयोगी, महंत रविन्द्रपुरी, राजेन्द्र दास कोटारी, महंत अविचलदास, महंत त्रयंबक भारती, रविन्द्र महाराज थानापति, राजूबाबा, वैज्ञानिक डा. यूके चौधरी, लाजपतराय बंसल, पूर्व सिंचाई मंत्री उत्तर प्रदेश ओमप्रकाश सिंह, श्री गंगा सभा के प्रतिनिधि के रूप में अशोक त्रिपाठी आदि ने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल ने कहा कि देश में भक्ति की भावना तो बढ़ी है पर धर्म की रक्षा की भावना घटी है। कांवड़ियों की संख्या बीस लाख से अधिक हो रही है, लेकिन धर्म की रक्षा की बात हो तो लोग सामने नहीं आते।


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