Wednesday, July 30, 2008

कब तक चलेगा तुष्टिकरण का खेल?

देश में हुए बम धमाकों ने तमाम सारे बुद्धिभोगियों के लिए सामान दे दिया। इधर मारे गए लोगों का दर्द नहीं है, दर्द है कि उनके विचारों को तवज्जो नहीं दी जा रही है. बमों के धमाकों ने किसी को कुछ दिया तो नहीं पर इन लोगों को जरूर बहस का मुद्दा दे दिया है. बम धमाकों की आड़ में हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर चर्चा आम हो गई है. कौन ज्यादा इस देश का है कौन इस देश का नहीं है, भाजपा ने क्या किया था, कांग्रेस ने क्या किया था.......अब दोनों क्या कर रहीं हैं, ये बात खोजी जा रही है पर तुष्टिकरण की नीति पर किसी का ध्यान नहीं है.
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