Thursday, July 31, 2008

हिन्दू विरोधी


पूरे भारत में हज यात्रियों के लिए बने स्थाई केन्द्रों और कश्मीर में किसी भी प्रकार के स्थाई इंतजामों से प्रदुषण नहीं फेलता,परन्तु आश्चार्य है की अमरनाथ यात्रियों के लिए की जा रही अस्थाई व्यवस्था से प्रदुषण भी फेलता है और इस्लाम को खतरा भी पैदा होता है.श्री अमरनाथ श्राईन बोर्ड ने इस ज़मीन का किराया 2 करोड 31 लाख 30 हज़ार 400 रुपये और इस जमीन पर लगे हर पेड़ की कीमत 1 लाख रुपये भी वन विभाग को दिए है
मैं पूचता हु की राजौरी में गुलाम शाह इस्लामिक विश्वविद्यालय बनाने के लिए मीन दी जा सकती है गुलमर्ग में रोशनी एक्ट के अंतर्गत 550 कनाल ज़मीन होटल्स के लिए दे सकते है.मुग़ल रोड के लिए हजारो पेड़ काटे जा सकते है लेकिन हिन्दुओं की अमरनाथ यात्रा के लिए ज़मीन देने पर वहां का पर्यावरण ख़राब हो जायेगा…?
सभी सांसकृतिक,सामाजिक और धार्मिक आस्था के केन्द्रों को ख़तम करके कश्मीर को पूरी तरह हिन्दू विहीन करने का षडयंत्र अब अपने अंतिम दौर में पंहुचा चूका है ऐतिहासिक स्थलों,नदियों, शहरों के नाम बदलने,काश्मीर में लाखो हिन्दुओ को उनके घरो से भागकर शरणार्थी बनने को मजबूर करने,हज यात्रियों के लिए हज हाउस बनाए और उन्हें हजारों सुविधाए देने,मुस्लिम मज़हबी गुटों को कोडियों के भाव ज़मीन देने के बाद घाटी के इन नेताओ ने पवित्र अमरनाथ यात्रा को नुक्सान पहुचाने के लिए प्रदेश में भारत विरोधी षडयंत्र तेज़ कर दिए है.
कश्मीर के विधानसभा की पर्यावरण समिति के अध्यक्ष ने भी स्पष्ट किया है की श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड को ज़मीन सिर्फ yatra के समाये अस्थाई रूप से देने का फैसला किसी भी मजहब के किलाफ़ नहीं है.इन सबके वाबजूद भी कश्मीर के अलगावादी नेताओ का सड़क पर उतरना उनके भारत और हिन्दू विरोधी होने का परिचयक नहीं है तो और क्या है?
अभी भी ज्यादा कुछ नहीं बिगडा है.समय रहते संभल जाओ वर्ना देश की तो क्या अपने घरो की इज्ज़त तक को बचाना मुस्किल हो जायेगा बंद करो इसे लोगो का समर्थन जो अल्पसंखाय्कवाद के नाम पर हिन्दू हितों की अनदेखी करते है और उनका उपयोग करते है.जागो………


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