Friday, August 1, 2008

हिंदू कौन है? क्या है? क्या करता है?

बम-धमाके, मन्दिर-मुद्दा, अमरनाथ यात्रा जमीन विवाद, गोधरा काण्ड, गुजरात दंगे, श्रीराम जन्मभूमि विवाद, श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद, विश्वनाथ मन्दिर विवाद, अक्षरधाम मन्दिर पर हमला..............क्या-क्या गिनाएं........कितना-कितना गिनाएं............कितनी-कितनी बार गिनाएं? चलिए गिनाते नहीं हैं बताते हैं, ये सब क्या हैं कुछ विवाद. इन विवादों के पीछे एक समानता है और वो है हिंदू होने की समानता. कुछ समझे आप? इन विवादों के पीछे सिर्फ़ और सिर्फ़ हिंदू जुडा है। अब कुछ समझ में आया? यानि कि हर विवाद के पीछे हिंदू रहता है.
आख़िर हिन्दुओं को भी चैन नहीं है कि वे शान्ति से बैठ सकें। अरे कोई आकर उनके आराध्यों का अपमान करता है तो करने दो. क्या वे अराध्य आकर हिन्दुओं से कहते हैं कि फलां-फलां उनका अपमान कर गया? कोई आराध्य क्या हिन्दुओं को खाने को देता है, किसी को नौकरी देता है? नहीं न, फ़िर किस बात पर हिंदू अपने आराध्यों के लिए विवाद खड़ा कर देते हैं? कुछ नहीं ये हिन्दुओं के खुरापाती दिमाग की उपज है कि अपने आराध्यों का नाम लेकर विवाद खडा करदो और फ़िर मुसलामानों को, सरकार को कोसते रहो.
चलो मान भी लिया कि आराध्यों से हिन्दुओं को कुछ लाभ भी होता है तो क्या देश की सुरक्षा से बड़ा, भाईचारे से बड़ा हो गया आराध्यों का मामला कि हिंदू उनकी थोड़ी सी बेइज्जती बर्दाश्त नहीं कर सके? इतनी छोटी सी मानसिकता लेकर हिंदू कहते हैं कि वे सच्चे देशभक्त हैं? वह हिंदू! थोड़ा सा भी बर्दास्त नहीं कर सकते। देश के लिए तो लोग जाने क्या-क्या बर्दाश्त नहीं करते.
वैसे देखा जाए तो हिदुओं ने सिवाय विवादों को जन्म देने के कुछ भी नहीं किया है। अरे मन्दिर (राम जन्मभूमि) का विवाद है, उसको हवा तो हिन्दू ही दे रहे हैं. तमाम सारे जागरूक नागरिक, नेता, धर्मनिरपेक्ष ताकतें बार-बार कह रहीं हैं कि विवादित भूमि पर हिंदू-मुस्लिम मिल कर कोई स्कूल, हॉस्पिटल या कोई समाज सेवा जैसा भवन बनवा दे. मुस्लिम तो तैयार है पर ये कट्टर हिंदू बिल्कुल भी मानने को तैयार नहीं हैं. हुई न विवाद की शुरुआत. अरे यदि मन्दिर न बन पाये कोई बात नहीं कुछ और बन जाने दो और अपनी सांस्कृतिक पहचान नष्ट हो जाने दो. वैसे भी हिन्दुओं की पहचान रह ही क्या गई है? यहाँ तुम अपनी पहचान, अपनी अस्मिता, अपने आराध्यों की जमीन पर कुछ भी बनवा लेने दो (सुलभ शौचालय ही सही) आख़िर भाईचारे का मामला है पर अपने बाप-दादाओं की गांवों-शहरों की एक-एक इंच जमीन पर सारी उमर मुकदमा लड़ते रहना, क्योंकि वो तुम्हारी संपत्ति है और ये भूमि विवादित है. विवाद हिन्दू पैदा कर रहा है, भाईचारा नहीं बना रहा है.
ओ हिन्दुओ! जागो, तुम्हारे देश के लोग धर्म-निरपेक्ष हैं और तुम विवाद पैदा करते जा रहे हो। सोचो जब तुम बड़े ही प्रेम से किसी से कहते हो सलाम साहब तो कहा जाता है कि कितना आदर है और जब तुम्ही कह देते हो जे श्रीराम तो कहा जाता है कि तुम्हारे अन्दर साम्प्रदायिकता की बू आ रही है. अब तुम हिन्दुओ ख़ुद सोचो तुम्हारा राम साम्प्रदायिकता लाता है तो तुम कैसे शान्ति लाओगे? भूल जाओ अपना अस्तित्व और जुट जाओ जी-हुजूरी करने में क्योंकि इस देश में जहाँ हिन्दुओं को छोड़ किसी भी धर्म की बात करो तो वो उनके विकास की बात होती है, धर्म-निरपेक्षता की बात होती है पर हिन्दू की बात करना भी विवाद का विषय होता है, साम्प्रदायिकता फैलाने वाला होता है.
साम्प्रदायिकता न फैलाओ, देश हित में, भाईचारे में, तुष्टिकरण में, आराध्यों की पूजा-अर्चना करने में, अपने धर्म-स्थानों की यात्रा करने में, हिन्दुओं के मरने पर दुःख प्रकट करने में, जे श्री राम बोलने में, विवादित देव-स्थानों को खाली करने की बात करने में, अपने धर्म के लिए कुछ भी करने में यदि जूते भी खाने पड़ें तो खाओ क्योंकि तुम हिन्दुओ सिवाय विवाद पैदा करने के कुछ भी नहीं करते.
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