Wednesday, July 2, 2008

अश्लील क्लिपिंग


अपराध और आधुनिक टेक्नालॉजी साथ-साथ चल रहे हैं। दुख की बात यह है कि अपराधी पुलिस से अधिक चालाक और तकनीक संपन्न हो गए हैं। एक दिन पहले उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून में चलती कार में एक युवती के साथ एक से अधिक दरिंदों द्वारा बलात्कार करने और उसकी अश्लील क्लिपिंग तैयार कर उसे प्रसारित करने का मामला जंगल की आग की तरह फैल गया। यह बड़ा ही सोचनीय विषय है कि इस मामले में अपराधी इतने आक्रामक थे कि वे अपने द्वारा किए गए जघन्य अपराध की क्लिपिंग भी खुलकर व्यावसायिक तौर पर प्रसारित कर रहे थे, जबकि पुलिस जानकारी के बाद भी सहमी हुई दिख रही थी। जैसे अपराध पुलिस ने किया हो। पुलिस की जानकारी में मामला आने के बाद भी कोई शिकायतकर्ता न होने के कारण पुलिस मामले में कोई कार्यवाही करने से झिझक रही थी। किसी राज्य में यदि अपराधी बेखौफ हों और पुलिस उन पर हाथ डालने से झिझक रही हो, वह भी बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के मामले में तो समझा जा सकता है कि स्थिति कितनी बदतर हो गई है। इस बीच यह अश्लील क्लिपिंग बाजार में धड़ल्ले से बिक रही है। व्यापार का यह एक नया औजार बाजार में आ गया है, लोग इसे खरीदने के लिए मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हैं। यह राज्य में अपराध की बदतर स्थिति की ओर साफ इशारा करता है। हालांकि देहरादून के एसएसपी ने इस मामले में खुफिया एजेंसी को जांच के निर्देश दिए हैं। कुछ लोग इसे मनचलों का नाटक भी बता रहे हैं। क्लिपिंग को व्यावसायिक तौर पर व्यापार का जरिया बनाने के लिए भी इस तरह का नाटक रचा गया हो सकता है। यदि ऐसी बात है, तो भी यह कम बड़ा अपराध नहीं है। दोनों ही स्थितियों में पुलिस को इस मामले की तह तक पहुंचने के प्रयास करने ही चाहिए। इस तरह के अपराधियों को यदि सीखचों की अंदर नहीं लाया गया तो इस प्रवृत्ति के दूसरे लोगों को भी अपराध को बढ़ावा देने का हौसला मिलेगा। वास्तविकता क्या है इसे सामने लाना ही होगा।


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